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बीए सेमेस्टर-1 शिक्षाशास्त्र

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2022
पृष्ठ :273
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2626
आईएसबीएन :000000000

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बीए सेमेस्टर-1 शिक्षाशास्त्र

प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?

अथवा

शिक्षा से तुम क्या समझते हो? शिक्षा की परिभाषाएँ लिखिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।

अथवा

शिक्षा को परिभाषित कीजिए। आपको जो अब तक ज्ञात परिभाषाएँ हैं उनमें से कौन-सी आपकी राय में सर्वाधिक स्वीकार्य है और क्यों?


उत्तर -

भूमिका
(Introduction)

मानव जीवन में शिक्षा का अद्वितीय महत्व है। शिक्षा के अभाव में मानव कह पाना असम्भव होगा। शिक्षा के पूर्ण अभाव में मनुष्य केवल प्राणी मात्र ही रह सकता है, मानव या इन्सान नहीं। शिक्षा प्राप्त करके ही व्यक्ति एक सामाजिक मानव बनता है। शिक्षा के ही आधार पर सभ्य-असभ्य व्यक्ति में अन्तर किया जाता है। शिक्षा का मानव मात्र के जीवन से घनिष्ठ सम्बन्ध है। यह मानव जीवन की अत्यधिक महत्वपूर्ण एवं जटिल क्रिया है। शिक्षा एक जटिल एवं व्यापक प्रक्रिया है, जो जीवन भर चलती है। शिक्षा के द्वारा ही व्यक्ति अपनी अपरिपक्वता को परिपक्वता में, बर्बरता को सभ्यता तथा पाश्विकता को मानवता में परिवर्तित करता है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति के शारीरिक, बौद्धिक तथा आध्यात्मिक शक्तियों एवं क्षमताओं का विकास होता है - इसी तथ्य को प्रसिद्ध पाश्चात्य दार्शनिक लॉक ने इन शब्दों में प्रतिपादित किया है। "पौधों का विकास कृषि द्वारा होता है और मनुष्यों का शिक्षा द्वारा।' शिक्षा मानव मात्र के लिए एक विशिष्ट भोज्य पदार्थ के रूप में होती है, जिसके द्वारा मनुष्य का शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक विकास की प्रक्रिया किसी न किसी रूप से चलती है। वास्तव में जन्म लेने के उपरान्त ही शिक्षा की प्रक्रिया किसी न किसी रूप में प्रारम्भ हो जाती है। जन्म के समय शिशु अनुभवशून्य होता है तथा उसके पश्चात् क्रमशः विभिन्न अनुभवों से परिचित होने लगता है। शिशु के अनुभवों में क्रमशः परिवर्तन एवं परिवर्द्धन होने लगता है। अनुभवों में होने वाले ये परिमार्जन ही शिक्षा हैं। शिक्षा की यह क्रिया केवल बाल्यकाल में ही नहीं चलती अपितु पूरे जीवन भर ही किसी न किसी रूप में चलती रहती है। मानव जीवन को सुन्दर, व्यवस्थित, परिमार्जित एवं सबल बनाने में शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

शिक्षा का अर्थ
(Meaning of Education)

शिक्षा एक व्यापक एवं जटिल प्रक्रिया है। अतः स्वाभाविक है कि इसका अर्थ भी व्यापक एवं विवादास्पद होगा। भिन्न-भिन्न विद्वानों एवं शिक्षाशास्त्रियों ने शिक्षा का अर्थ अपने-अपने ढंग से प्रतिपादित किया है। भित्र-भित्र विद्वानों ने शिक्षा के किसी एक पक्षीय रूप को ध्यान में रखते हुए उसके अर्थ का निर्धारण किया है। शिक्षा के वास्तविक अर्थ को जानने के लिए इसके शाब्दिक अर्थ, प्रचलित अर्थ, व्यापक एवं संकुचित अर्थ को जानना अभीष्ट होगा।
1. शिक्षा का प्रचलित अर्थ - आज के सभ्य मानव समाज में शिक्षा शब्द के सामान्य रूप से सभी लोग परिचित हैं। परन्तु यह परिचय शिक्षा के शास्त्रीय अथवा वैज्ञानिक अर्थ से न होकर केवल प्रचलित अर्थ से होता है। प्रचलित अर्थ के अनुसार किसी विषय से सम्बन्धित तथ्यों एवं सूचनाओं को एकत्रित कर लेना मात्र शिक्षा कहलाता है। इस अर्थ में किसी भी प्रकार उचित अथवा अनुचित ढंग से आवश्यक सूचनाओं को जान लेना तथा संकलित कर लेना ही शिक्षा है। इस अर्थ ने आन्तरिक विकास के महत्व को स्वीकार नहीं किया। अतः यह न तो शिक्षा का वास्तविक अर्थ है न ही शिक्षा का पूर्ण परिचय ही है। इस अर्थ की आलोचना करते हुए कहा गया है कि शिक्षा अन्दर से विकास होने को कहते हैं न कि बाहर से संशय को। वह तो स्वाभाविक मूल प्रवृत्तियों और रुचियों की क्रिया से होती है न कि बाह्य शक्तियों की प्रतिक्रिया स्वरूप।
2. शिक्षा का शाब्दिक अर्थ - किसी भी प्रत्यय अथवा शास्त्र के अर्थ का विवेचन करने के लिए सर्वप्रथम उसका शाब्दिक अर्थ भी सार्थक एवं महत्वपूर्ण होता है। हिन्दी में शिक्षा तथा अंग्रेजी में (Education) पर्यायवाची शब्द हैं। अतः शिक्षा के शाब्दिक अर्थ को जानने के लिए इन दोषों का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ जानना आवश्यक होगा।
हिन्दी भाषा में प्रचलित अर्थ शिक्षा मूलभूत रूप से संस्कृत भाषा के 'शिक्षा' धातु से बना है। संस्कृत में यह धातु ग्रहण करना या विद्या प्राप्त करने के लिए प्रयोग होता है। इस शाब्दिक अर्थ को ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता है कि शिक्षा का अर्थ उस प्रक्रिया से है जिसके माध्यम से ज्ञान या विद्या प्राप्त की जाती है। बहुत से विद्वानों ने शिक्षा के इसी अर्थ को स्वीकार किया है।
शिक्षा का अंग्रेजी पर्यायवाची शब्द 'Education' है। यह शब्द लैटिन भाषा के एडूकेटम (Educatum) शब्द से बना है। जिसका अर्थ है - अन्तर्निहित शक्तियों एवं क्षमताओं को बाहर निकालना। इस आधार पर कहा जा सकता है कि -
Education या शिक्षा वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से सम्बन्धित व्यक्ति की निहित शक्तियों य गुणों का विकास एवं प्रस्फुटन होता है। यहाँ स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि इस अर्थ में शिक्षा एक व्याप्त प्रत्यय है, यह संस्थागत शिक्षा तक सीमित नहीं है।
3. शिक्षा का व्यापक अर्थ - शिक्षा के संकुचित अर्थ के अतिरिक्त इसके व्यापक अर्थ को भी जानना अनिवार्य है। व्यापक अर्थ में शिक्षा एक अति व्यापक एवं जटिल प्रक्रिया है, जो ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम है। इस अर्थ में शिक्षा जीवन भर चलती रहती है तथा पूरा संसार ही शिक्षा ग्रहण करने का क्षेत्र है। इस अर्थ का प्रतिपादन प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री जे. एस. मैकेंजी ने इन शब्दों में किया है - "विस्तृत अर्थ में शिक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है जो आजीवन चलती रहती है और जीवन के प्रायः प्रत्येक अनुभव से उसके भण्डार में वृद्धि होती है।' इस अर्थ में विद्यालय ही एकमात्र शिक्षा के केन्द्र नहीं है। व्यापक अर्थ में केवल अध्यापक ही शिक्षक नहीं है। इस अर्थ में जिस भी व्यक्ति से कुछ नई बात सीखी जाये, वही शिक्षक है। इस अर्थ में हमारा पर्यावरण भी हमारा शिक्षक अर्थात् ज्ञान प्रदान करने वाला है। व्यापक अर्थों में जीवन भर व्यक्ति पर पड़ने वाले समस्त प्रभाव ही शिक्षा है। इस विषय में प्रो डमविल का कथन है "शिक्षा के व्यापक अर्थ में तो सभी प्रभाव आते हैं जो व्यक्ति को जन्म से लेकर मृत्यु तक प्रभावित करते हैं।' व्यापक अर्थ में शिक्षा का उद्देश्य प्रमाण पत्र प्राप्त करना नहीं है। इस अर्थ में शिक्षा का उद्देश्य भी व्यापक है। शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति के व्यक्तित्व का सर्वागीण विकास करना होता है। शिक्षा के इस रूप की एडलर महोदय ने इन शब्दों में प्रस्तुत किया है, "शिक्षा मनुष्य के सम्पूर्ण जीवन से सम्बन्धित क्रिया है। यह केवल छोटे बालक सम्बन्धित नहीं होती, यह तो जन्म से ही प्रारम्भ होती है और मृत्यु तक चलती रहती है।
वास्तविक शिक्षा का सम्बन्ध जीवन के सर्वागीण विकास की शिक्षा से है। यह शिक्षा स्वयं अपन आप में साध्य है।
4. शिक्षा का संकुचित अर्थ  (Narrow Meaning of Education)- शिक्षा की प्रक्रिया की व्यापकता को ध्यान में रखते हुए शिक्षक के एक संकुचित अर्थ का भी प्रतिपादन किया गया है। संकुचित अर्थ में शिक्षा संस्थान में प्राप्त होने वाला ज्ञान है। इस अर्थ में नियमित रूप से पाठशाला या विद्यालय में प्रवेश लेकर विभिन्न परीक्षाएँ पास करना मात्र शिक्षा है। इसी प्रकार की शिक्षा तभी प्रारम्भ होती है, जब बालक नियमित रूप से संस्थान में प्रदेश पाता है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट है कि इस प्रकार की शिक्षा विद्यार्थी जीवन समाप्त होने तथा विद्यालय छोड़ने तक ही सीमित है। विद्यालय छोड़ने के साथ ही साथ शिक्षा की प्रक्रिया भी रुक जाती है। इस आधार पर वह व्यक्ति अशिक्षित ही कहलायेगा, जिसने किसी शिक्षा संस्थान में नियमित रूप से शिक्षा ग्रहण न की हो। इस अर्थ में शिक्षा केवल निर्धारित पाठ्यक्रम का अध्ययन मात्र होती है। इस अर्थ में शिक्षा का उद्देश्य डिग्री या प्रमाण-पत्र ग्रहण करना ही होता है। वर्तमान भारतीय परिवेश में नौकरी आदि प्राप्त करने के लिए इसी प्रकार की शिक्षा तथा प्रमाणपत्रों का महत्व स्वीकार किया जा रहा है। परन्तु यदि तटस्थ रूप से देखा जाये तो यह मान्यता उचित प्रतीत होती है।
शिक्षा की परिभाषा अपने शब्दों में निम्न प्रकार दी जा सकती है - 'शिक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है, जो बालक के जन्म के समय से आरम्भ होकर उसके मरने के समय तक चलती रहती है और मरने के समय तक वह इससे कुछ न कुछ सीखता रहता है।"
इस प्रकार स्पष्ट है कि शिक्षा बालक के जीवन में जीवनपर्यन्त चलने वाली एक निरन्तर प्रक्रिया है।

शिक्षा की परिभाषा
(Definition of Education)

शिक्षा के उपरोक्त वर्णित अर्थों को जानने के बाद शिक्षा की एक समुचित परिभाषा ति करनी भी आवश्यक है। परिभाषा के निर्धारण द्वारा शिक्षा के अर्थ स्पष्टीकरण में सहायता प्राप्त होगी। अमेक भारतीय तथा पाश्चात्य विद्वानों ने शिक्षा की अवधारणा को परिभाषित करने का प्रयास किया है। यहाँ अलग-अलग दृष्टिकोण से भारतीय तथा पाश्चात्य विद्वानों द्वारा प्रतिपादित परिभाषाएँ प्रस्तुत की जायेंगी।
1. भारतीय विद्वानों द्वारा शिक्षा की परिभाषा- प्राचीन तथा आधुनिककाल के विभिन्न भारतीयों विद्वानों एवं शिक्षाशास्त्रियों ने शिक्षा की प्रक्रिया की विभिन्न विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षा की परिभाषाएँ प्रस्तुत की हैं। कुछ मुख्य भारतीय विद्वानों द्वारा परिभाषित परिभाषाओं का विवरण निम्न वर्णित है -
विवेकानन्द द्वारा परिभाषित विवेकानन्द ने भी स्वीकार किया है कि शिक्षा द्वारा मनुष्य की आध्यात्मिक शक्तियों का विकास होता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है, "शिक्षा मनुष्य के अन्तर में निहित ब्रह्म भाव की अभिव्यक्ति है।
अरविन्द द्वारा परिभाषित - आधुनिक युग के प्रसिद्ध विद्वान योगीराज श्री अरविन्द घोष ने शिक्षा को एक सहायक प्रक्रिया में स्वीकार किया है जो मनुष्य की आत्मिक प्रगति में सहायता प्रदान करती है। उनके शब्दों में, "प्रगतिशील आत्मा को अपने भीतर निहित तत्वों की सहायता देना ही शिक्षा है।
टैगोर द्वारा परिभाषित गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने शिक्षा के व्यापक अर्थ को ध्यान में रखते शिक्षा की परिभाषा इन शब्दों में प्रस्तुत की, "उच्चतम शिक्षा वह है जो केवल हमें शिक्षा ही नहीं देती वरन् हमारे जीवन को प्रत्येक अस्तित्व के अनुकूल बनाती है।'
महात्मा गाँधी द्वारा परिभाषित - महात्मा गाँधी ने भी शिक्षा को एक व्यापक एवं बहुपक्षीय प्रक्रिया स्वीकार किया है। उनके अनुसार, "शिक्षा से मेरा अभिप्राय बालक तथा मनुष्य के शरीर, मन और आत्मा में अन्तर्निहित शक्तियों के सर्वांगीण प्रकट्य से है।'
2. पाश्चात्य विद्वानों द्वारा शिक्षा की परिभाषाएँ - अनेक ग्रीक एवं पाश्चात्य विचारकों ने भी समय-समय पर शिक्षा की विभिन्न परिभाषाएँ प्रस्तुत की हैं -
अरस्तू - "शिक्षा स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन की रचना करती है।'
सुकरात "शिक्षा का आशय है सार्वजनिक प्रमाणिकता के विचारों को प्रकाश में लाना जोकि व्यक्ति के मन में निहित है।
प्लेटो - "शिक्षा शारीरिक, मानसिक तथा बौद्धिक विकास की एक प्रक्रिया है।'
पेस्टालाजी - "शिक्षा मनुष्य की आन्तरिक शक्तियों का स्वाभाविक समन्वित एवं प्रगतिशील विकास है।'
उपर्युक्त वर्णित विभिन्न परिभाषाओं द्वारा शिक्षा का वास्तविक अर्थ स्पष्ट हो जाता है। वास्तव में शिक्षा एक विस्तृत प्रक्रिया है जिसका सम्बन्ध व्यक्ति के सर्वांगीण अर्थात् आन्तरिक एवं बाहरी विकास से है। यह प्रक्रिया जीवन भर चलती रहती है। संक्षेप में कहा जा सकता है कि शिक्षा एक प्रयोजनशील तथा आजीवन चलने वाली एक गत्यात्मक प्रक्रिया है। शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति के आचार-विचार तथा अन्य पक्षों का परिमार्जन एवं संशोधन करना है। शिक्षा के परिणामस्वरूप व्यक्ति और समाज दोनों का उन्नयन होता है। शिक्षा के अर्थ के और स्पष्टीकरण के लिए इसकी मुख्य विशेषताओं का संक्षिप्त वर्णन भी प्रस्तुत किया जा रहा है।

शिक्षा की विशेषताएँ
(Characteristics of Education)

1. सचतेन प्रक्रिया - किन्ही अर्थों में शिक्षा को एक सचेतन प्रक्रिया भी कहा जाता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो जान-बूझकर तथा सप्रयास चलाई जाती है। शिक्षक शिक्षार्थी को नियमित रूप से शिक्षा प्रदान करता है।
2. यह विकास की एक प्रक्रिया है - शिक्षा के परिणामस्वरूप व्यक्ति का विकास होता है। विकास उस प्रक्रिया को कहा जाता है, जिसके द्वारा आन्तरिक शक्तियों का प्रगटीकरण या प्रस्फुटन होता है। शिक्षा में बाहर से कुछ नहीं थोपा जाता बल्कि अन्दर से विकास होता है।
3. शिक्षा एक प्रक्रिया है - शिक्षा को एक प्रक्रिया (Process) के रूप में स्वीकार किया जाता है। शिक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है जो जीवन भर चलती रहती है। शिक्षा की इस प्रक्रिया से ही जीवन का विकास होता है।
4. शिक्षा एक द्विमुखी प्रक्रिया है - शिक्षा की प्रक्रिया में दो धुरियाँ हैं अर्थात् शिक्षक तथा विद्यार्थी। यह भी कहा जा सकता है कि प्रक्रिया में शिक्षक तथा शिक्षार्थी दोनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। दोनों का एक-दूसरे के व्यक्तित्व पर प्रभाव पड़ता है।
5. शिक्षा की प्रक्रिया आजीवन चलती रहती है - शिक्षा के व्यापक एवं वास्तविक अर्थ को ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता है कि यह प्रक्रिया जीवन भर चलती रहती है। शिक्षा की प्रक्रिया जन्म से ही प्रारम्भ हो जाती है तथा मृत्यु तक चलती है। शिक्षा को केवल पाठशाला तथा संस्थागत शिक्षा के रूप में सीमित नहीं किया जा सकता।
6. शिक्षा के दो पक्ष होते हैं - शिक्षा की प्रक्रिया के दो पक्ष होते हैं अर्थात् मनोवैज्ञानिक तथा सामाजिक। बालक की मूल प्रवृत्तियों, संवेगों तथा प्राकृतिक शक्तियों के विकास का अध्ययन शिक्षा के मनोवैज्ञानिक पक्ष के अन्तर्गत किया जाता है तथा सामाजिक आदर्शों, मूल्यों एवं मान्यताओं का अध्ययन शिक्षा के सामाजिक पक्ष के अन्तर्गत किया जाता है। इस विषय में प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री डीवी महोदय का कहना है, "सभी प्रकार की शिक्षा व्यक्ति द्वारा सामाजिक जीवन की सक्रियतापूर्वक भाग लेने से आगे बढती है।'

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा में गुरु-शिष्य के परस्पर सम्बन्धों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
  2. प्रश्न- वैदिक शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  3. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे? वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य गुण एवं दोष बताइए।
  4. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
  5. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के प्रमुख गुण बताइए।
  6. प्रश्न- वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य दोष क्या थे?
  7. प्रश्न- प्राचीन काल में शिक्षा से क्या अभिप्राय था? शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे?
  8. प्रश्न- वैदिककालीन उच्च शिक्षा का वर्णन कीजिए।
  9. प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा में प्रचलित समावर्तन और उपनयन संस्कारों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  10. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान का विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति करना था। स्पष्ट कीजिए।
  11. प्रश्न- आधुनिक काल में प्राचीन वैदिककालीन शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
  12. प्रश्न- वैदिक शिक्षा में कक्षा नायकीय प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए।
  13. प्रश्न- वैदिक कालीन शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
  14. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न सम्प्रत्ययों का उल्लेख करते हुए उसके वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
  15. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
  16. प्रश्न- शिक्षा के दार्शनिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  17. प्रश्न- शिक्षा के समाजशास्त्रीय सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  18. प्रश्न- शिक्षा के राजनीतिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  19. प्रश्न- शिक्षा के आर्थिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  20. प्रश्न- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  21. प्रश्न- शिक्षा के वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
  22. प्रश्न- क्या मापन एवं मूल्यांकन शिक्षा का अंग है?
  23. प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?
  24. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
  25. प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
  26. प्रश्न- शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  27. प्रश्न- आपके अनुसार शिक्षा की सर्वाधिक स्वीकार्य परिभाषा कौन-सी है और क्यों?
  28. प्रश्न- 'शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।' जॉन डीवी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
  29. प्रश्न- 'शिक्षा भावी जीवन की तैयारी मात्र नहीं है, वरन् जीवन-यापन की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के इस कथन को उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
  30. प्रश्न- शिक्षा के क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
  31. प्रश्न- शिक्षा की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
  32. प्रश्न- शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  33. प्रश्न- शिक्षा और साक्षरता पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए। इन दोनों में अन्तर व सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
  34. प्रश्न- शिक्षण और प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डालिए।
  35. प्रश्न- विद्या, ज्ञान, शिक्षण प्रशिक्षण बनाम शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
  36. प्रश्न- विद्या और ज्ञान में अन्तर समझाइए।
  37. प्रश्न- शिक्षा और प्रशिक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।
  38. प्रश्न- ज्ञान के अर्थ तथा उसकी अवधारणा की व्याख्या कीजिए।
  39. प्रश्न- शिक्षा के प्रमुख घटकों का वर्णन कीजिए।
  40. प्रश्न- शिक्षा और शिक्षण के सम्प्रत्यय पर प्रकाश डालिए।
  41. प्रश्न- व्यापक शिक्षा तथा संकुचित शिक्षा में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  42. प्रश्न- शिक्षा के विषय-विस्तार को संक्षेप में लिखिए
  43. प्रश्न- "शिक्षा आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है।' स्पष्ट कीजिए।
  44. प्रश्न- "अच्छे नैतिक चरित्र का विकास ही शिक्षा है।' समझाइए।
  45. प्रश्न- शिक्षा को मनुष्य एवं समाज का निर्माण करना चाहिए। कथन को स्पष्ट कीजिए।
  46. प्रश्न- महात्मा गाँधी जी की शिक्षा की परिभाषा लिखिए।
  47. प्रश्न- "सा विद्या या विमुक्तये' पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  48. प्रश्न- शिक्षा के व्यापक अर्थ को स्पष्ट कीजिए।
  49. प्रश्न- शिक्षा एक द्विमुखी प्रक्रिया है। स्पष्ट कीजिए।
  50. प्रश्न- "शिक्षा आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है।' समझाइए।
  51. प्रश्न- "शिक्षा मनुष्य की जन्मजात शक्तियों का स्वाभाविक समरूप एवं प्रगतिशील विकास है।' व्याख्या कीजिए।
  52. प्रश्न- शिक्षा से मेरा अभिप्राय बालक और मनुष्य के शरीर, मन और आत्मा के सर्वागीण और सर्वोच्च विकास से है।' शिक्षा की इस परिभाषा से आप कहाँ तक सहमत हैं? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
  53. प्रश्न- जॉन डी वी के अनुसार शिक्षा की परिभाषा बताइए।
  54. प्रश्न- शिक्षा के उद्देश्यों की विवेचना संक्षेप में कीजिए। शिक्षा के उद्देश्यों की क्या आवश्यकता है?
  55. प्रश्न- उद्देश्य निर्धारित हो जाने से कौन-कौन से लाभ होते हैं?
  56. प्रश्न- शिक्षा के उद्देश्यों की क्या आवश्यकता है?
  57. प्रश्न- शिक्षा के उद्देश्य बताइए।
  58. प्रश्न- शिक्षा के आदर्श उद्देश्यों के गुणों की विवेचना कीजिए।
  59. प्रश्न- धर्मनिरपेक्ष तथा लोकतंत्रीय भारत के लिए शिक्षा के सर्वाधिक उद्देश्य कौन से हैं?
  60. प्रश्न- शारीरिक विकास के उद्देश्य की विवेचना कीजिए।
  61. प्रश्न- मानसिक विकास के उद्देश्य की विवेचना कीजिए।
  62. प्रश्न- सामाजिक विकास के उद्देश्य की विवेचना कीजिए।
  63. प्रश्न- सांस्कृतिक विकास के उद्देश्य की विवेचना कीजिए।
  64. प्रश्न- नैतिक एवं चारित्रिक विकास के उद्देश्य को समझाइए।
  65. प्रश्न- व्यावसायिक विकास के उद्देश्य की विवेचना कीजिए।
  66. प्रश्न- शासनतन्त्र एवं नागरिकता की शिक्षा के उद्देश्य की विवेचना कीजिए।
  67. प्रश्न- राष्ट्र की आवश्यकताओं एवं आकांक्षाओं की पूर्ति के उद्देश्य की विवेचना कीजिए।
  68. प्रश्न- आध्यात्मिक चेतना के विकास के उद्देश्य की विवेचना कीजिए।
  69. प्रश्न- "वैयक्तिक और सामाजिक उद्देश्य एक दूसरे के पूरक हैं।' इसका वर्णन कीजिए।
  70. प्रश्न- शिक्षा के उद्देश्य सम्बन्धी शिक्षाशास्त्रियों के विचार को बताइए।
  71. प्रश्न- क्या शिक्षा के वैयक्तिक और सामाजिक उद्देश्यों में समन्वय स्थापित करना सम्भव है? यदि हाँ, तो कैसे?
  72. प्रश्न- भारतीय जनतन्त्र में शिक्षा के उद्देश्यों की स्पष्ट व्याख्या कीजिए।
  73. प्रश्न- शिक्षा के व्यावसायीकरण से आप क्या समझते हैं? इसकी आवश्यकता एवं महत्व पर प्रकाश डालिए।
  74. प्रश्न- भारत में व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा का स्वरूप क्या है? व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा के उद्देश्यों की व्याख्या कीजिए।
  75. प्रश्न- भारत में व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा के उद्देश्यों के बारे में बताइए।
  76. प्रश्न- क्या शिक्षा के विविध उद्देश्यों का एक उद्देश्य में संश्लेषण किया जाना चाहिए? यदि हाँ तो वह उद्देश्य क्या होना चाहिए और क्यों?
  77. प्रश्न- उद्देश्य और लक्ष्य में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  78. प्रश्न- निरौपचारिक शिक्षा के सामाजिक उद्देश्य बताइए।
  79. प्रश्न- "वैयक्तिक और सामाजिक उद्देश्य एक-दूसरे के पूरक हैं।" इस कथन की व्याख्या कीजिए।
  80. प्रश्न- सामाजिक दृष्टि से भारत में शिक्षा के उद्देश्य बताइए।
  81. प्रश्न- शिक्षा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण उद्देश्य कौन-सा है और क्यों?
  82. प्रश्न- शिक्षा के वैक्तिक उद्देश्य से क्या तात्पर्य है?
  83. प्रश्न- राष्ट्रीय जीवन में शिक्षा के क्या कार्य होने चाहिये?
  84. प्रश्न- शिक्षा की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
  85. प्रश्न- व्यक्ति के जीवन में शिक्षा का क्या कार्य है?
  86. प्रश्न- राष्ट्रीय जीवन में शिक्षा का क्या कार्य है?
  87. प्रश्न- “शिक्षा मानव विकास का मूल साधन है।' इस कथन की व्याख्या करते हुए इसके कार्य, आवश्यकता एवं महत्व स्पष्ट कीजिए।
  88. प्रश्न- सामाजिक जीवन में शिक्षा के क्या कार्य हैं?
  89. प्रश्न- राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के क्या कार्य हैं?
  90. प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के क्या कार्य है?
  91. प्रश्न- मानव जीवन में शिक्षा के कार्यों की विवेचना कीजिए।
  92. प्रश्न- व्यक्ति के प्रति शिक्षा के दो कार्यों को बताइए।
  93. प्रश्न- संस्कृति से आप क्या समझते हैं? संस्कृति की आवश्यकता एवं महत्व पर संक्षिप्त प्रकाश डालिए।
  94. प्रश्न- सांस्कृतिक विलम्बना (पिछड़) को समझाइए।
  95. प्रश्न- शिक्षा व संस्कृति में सम्बन्ध का वर्णन कीजिए।
  96. प्रश्न- भारतीय संस्कृति के आधुनिक स्वरूप पर प्रकाश डालिए।
  97. प्रश्न- भारतीय सांस्कृतिक धरोहर की प्रमुख विशेषताओं का संक्षिप्त में उल्लेख कीजिए।
  98. प्रश्न- सांस्कृतिक विरासत से आप क्या समझते हैं? यह शिक्षा से किस प्रकार सम्बधित है?
  99. प्रश्न- भारतीय संस्कृति की आवश्यकता व महत्व पर प्रकाश डालिए।
  100. प्रश्न- कौशल अधिग्रहण क्या है? कौशल अधिग्रहण के तीन चरणों के बारे में बताइए।
  101. प्रश्न- कौशल अधिग्रहण के लिए संज्ञानात्मक दृष्टिकोण पर प्रकाश डालिए।
  102. प्रश्न- कौशल अधिग्रहण के महत्व की विवेचना कीजिए।
  103. प्रश्न- मूल्य शब्द का अर्थ बताइए। मानव जीवन में मूल्यों का क्या स्थान है?
  104. प्रश्न- बालक में भारतीय जीवन मूल्यों की स्थापना में परिवार अथवा विद्यालय की भूमिका की व्याख्या कीजिए।
  105. प्रश्न- जीवन मूल्यों की स्थापना में परिवार का क्या महत्व है?
  106. प्रश्न- जीवन मूल्यों की स्थापना में विद्यालय का क्या महत्व है?
  107. प्रश्न- मूल्य शिक्षा व मूल्यपरक शिक्षा की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए और उसके मार्गदर्शक सिद्धान्तों तथा उद्देश्य की विवेचना कीजिए।
  108. प्रश्न- सांस्कृतिक शिक्षा एवं सांस्कृतिक मूल्यों के विकास के अभिकरण बताइए।
  109. प्रश्न- मूल्य कितने प्रकार के होते हैं?
  110. प्रश्न- मूल्यपूरक शिक्षा की आवश्यकता समझाइए।
  111. प्रश्न- मूल्य निर्माण में विद्यालय की क्या भूमिका है?
  112. प्रश्न- शैक्षिक मूल्यों से आप क्या समझते हैं?
  113. प्रश्न- सामाजिक तथ्य क्या है? इसी के साथ ही सामाजिक एकता की विवेचना कीजिए।
  114. प्रश्न- सामाजिक एकता का सिद्धान्त बताइए।
  115. प्रश्न- यान्त्रिक और सावयवी एकता में अन्तर बताइए।
  116. प्रश्न- अवकाश क्या है? अवकाश शिक्षा के क्या लाभ हैं? स्पष्ट कीजिए।
  117. प्रश्न- अवकाश शिक्षा का क्या अर्थ है? दो प्रकार के अवकाश के बारे में बताइए।
  118. प्रश्न- अवकाश की अवधारणा को समझाइए।
  119. प्रश्न- राष्ट्रीय एकता क्या है? राष्ट्रीय एकता के लिए शैक्षिक कार्यक्रम बताइए।
  120. प्रश्न- राष्ट्रीय एकता क्या है?
  121. प्रश्न- राष्ट्रीय एकता के विकास में आने वाली बाधाओं को दूर करने के उपाय कौन-कौन से हैं?
  122. प्रश्न- भारत में भावात्मक एवं राष्ट्रीय एकता के मार्ग में आने वाली बाधाओं का वर्णन कीजिए इस सम्बन्ध में गोष्ठियों एवं समितियों के विचारों का भी उल्लेख कीजिए।
  123. प्रश्न- राष्ट्रीय एकता का अर्थ स्पष्ट कीजिए। शिक्षा राष्ट्रीय एकता के विकास में किस प्रकार सहायता कर सकती है?
  124. प्रश्न- राष्ट्रीय एकता का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
  125. प्रश्न- शिक्षा राष्ट्रीयता के विकास में किस प्रकार सहायता कर सकती है?
  126. प्रश्न- भावात्मक एवं राष्ट्रीय एकता के विकास के लिए कौन-कौन से उपाय हैं?
  127. प्रश्न- राष्ट्रीय एकीकरण एकता के मार्ग में कौन-कौन सी बाधाएँ हैं? शिक्षा राष्ट्रीय एकीकरण के विकास में किस प्रकार योगदान दे सकती है?
  128. प्रश्न- राष्ट्रीय एकता के लिए किए गए सरकारी प्रयासों को बताइए।
  129. प्रश्न- धर्मनिरपेक्षता क्या है?
  130. प्रश्न- राष्ट्रीय एकता की प्राप्ति के उपायों को सुझाइये।
  131. प्रश्न- राष्ट्रीय एकीकरण की आवश्यकता पर प्रकाश डालिए।
  132. प्रश्न- राष्ट्रीय एकता की समस्या पर प्रकाश डालिए।
  133. प्रश्न- राष्ट्रीय एकता के लिए शिक्षा के क्या उद्देश्य हैं?
  134. प्रश्न- राष्ट्रीय एकता के लिए शैक्षिक कार्यक्रम बताइए।
  135. प्रश्न- भावात्मक एकता क्या है?
  136. प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय बोध का विकास करने के उपाय की व्याख्या कीजिए।
  137. प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना के विकास के सिद्धान्त बताइए।
  138. प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा के उद्देश्यों का वर्णन कीजिए।
  139. प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना के विकास के लिए क्या-क्या उपाय किये गये हैं?
  140. प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना की आवश्यकता एवं महत्व पर प्रकाश डालिए।
  141. प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय सदभावना से आप क्या समझते हैं?
  142. प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना के विकास में आवश्यकता एवं महत्व पर प्रकाश डालिए।
  143. प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीयता के विकास के उपायों का उल्लेख कीजिए।
  144. प्रश्न- आप अन्तर्राष्ट्रीयता से क्या समझते हैं?
  145. प्रश्न- अंतर्राष्ट्रीयता के गुण-दोष पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  146. प्रश्न- अंतर्राष्ट्रीयता के विकास में बाधक तत्वों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  147. प्रश्न- अंतर्राष्ट्रीयता अवबोध के विकास में यूनेस्को की भूमिका पर संक्षिप्त प्रकाश डालिए।
  148. प्रश्न- भावात्मक एकता, राष्ट्रीय एकता और अंतर्राष्ट्रीयता को समझाइए।
  149. प्रश्न- भारत में भावात्मक एकता की आवश्यकता पर प्रकाश डालिए।
  150. प्रश्न- संकीर्ण राष्ट्रीयता से आप क्या समझते हैं?
  151. प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण का क्या अर्थ है?
  152. प्रश्न- मानवीय संसाधन से आप क्या समझते हैं? मानवीय संसाधन का शिक्षा में महत्व बताइये।
  153. प्रश्न- मानवीय साधन कितने प्रकार के होते हैं तथा इसकी आवश्यकता बताइए।
  154. प्रश्न- मानव संसाधन विकास की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा द्वारा मानव संसाधनों के विकास की विवेचना कीजिए।
  155. प्रश्न- मानव संसाधन विकास का परिभाषाओं सहित वर्णन कीजिए।
  156. प्रश्न- मानव संसाधन विकास का क्या अर्थ है? इसके लिए किस प्रकार की शिक्षा की आवश्यकता है?
  157. प्रश्न- मानवीय संसाधनों की प्रमुख विशेषताएँ बताइये।
  158. प्रश्न- मानव पूँजी के रूप में शिक्षा का वर्णन कीजिए।
  159. प्रश्न- मानव शक्ति नियोजन से आप क्या समझते हैं?
  160. प्रश्न- मानव शक्ति नियोजन की प्रमुख सीमाओं की विवेचना कीजिए।
  161. प्रश्न- उत्पादन क्रिया के रूप में शिक्षा का वर्णन कीजिए।
  162. प्रश्न- शिक्षा के साधनों से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न साधनों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
  163. प्रश्न- शिक्षा के साधनों से आप क्या समझते हैं?
  164. प्रश्न- औपचारिक साधन से आप क्या समझते हैं?
  165. प्रश्न- शिक्षा के अनौपचारिक साधन से आप क्या समझते हैं? विस्तार से समझाइए।
  166. प्रश्न- शिक्षा के अन्य अनौपचारिक साधनों की विवेचना कीजिए।
  167. प्रश्न- शिक्षा के सक्रिय व निष्क्रिय साधन लिखिए।
  168. प्रश्न- ब्राउन ने शिक्षा के अभिकरणों को कितने भागों में बाँटा है? प्रत्येक का वर्णन कीजिए।
  169. प्रश्न- औपचारिक, निरौपचारिक और अनौपचारिक अभिकरणों के सापेक्षिक सम्बन्धों की व्याख्या कीजिए।
  170. प्रश्न- शिक्षा के अनौपचारिक साधनों में जनसंचार के साधनों का क्या योगदान है?
  171. प्रश्न- अनौपचारिक और औपचारिक शिक्षा में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  172. प्रश्न- औपचारिक तथा अनौपचारिक साधनों में कौन अधिक महत्वपूर्ण है?
  173. प्रश्न- संविधान में शिक्षा से सम्बन्धित प्रावधानों का वर्णन कीजिए।
  174. प्रश्न- शिक्षा के उद्देश्यों से सम्बन्धित संवैधानिक मूल्यों की विवेचना कीजिए।
  175. प्रश्न- स्वतन्त्रता, न्याय, समता एवं बन्धुत्व की संवैधानिक वचनबद्धता के संदर्भ में शिक्षा की विवेचना कीजिए।
  176. प्रश्न- मौलिक अधिकारों का क्या अर्थ है? मौलिक अधिकार व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ बताइये।
  177. प्रश्न- भारतीय नागरिकों को प्राप्त मूल अधिकारों का मूल्यांकन कीजिए।
  178. प्रश्न- मौलिक कर्त्तव्य कौन-कौन से हैं? इनके महत्व को स्पष्ट कीजिए।
  179. प्रश्न- भारतीय संविधान के अधिकार पत्र की प्रमुख विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
  180. प्रश्न- मानव अधिकारों की रक्षा के लिए किये गये विशेष प्रयत्न इस दिशा में कितने कारगर हैं? विश्लेषण कीजिए।
  181. प्रश्न- भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों के उल्लेख की आवश्यकता पर टिप्पणी लिखिए।
  182. प्रश्न- विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर टिप्पणी लिखिए।
  183. प्रश्न- सम्पत्ति के अधिकार पर टिप्पणी लिखिए।
  184. प्रश्न- मौलिक अधिकार एवं नीति-निदेशक तत्वों में अन्तर बतलाइये।
  185. प्रश्न- 'निवारक निरोध' से आप क्या समझते हैं?
  186. प्रश्न- क्या मौलिक अधिकारों को निलंबित किया जा सकता है?
  187. प्रश्न- मौलिक कर्त्तव्यों का मूल्यांकन कीजिए।
  188. प्रश्न- पूर्व-प्राथमिक शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए उसके महत्व का उल्लेख कीजिए।
  189. प्रश्न- पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के उद्देश्यों का उल्लेख करते हुए पूर्व प्राथमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम एवं शिक्षण विधियों का वर्णन कीजिए।
  190. प्रश्न- किण्डरगार्टन प्रणाली के गुण-दोषों की व्याख्या करते हुए मूल्यांकन कीजिए।
  191. प्रश्न- किण्डरगार्टन प्रणाली के गुणों की व्याख्या कीजिए।
  192. प्रश्न- किण्डरगार्टन प्रणाली के दोषों को बताइए।
  193. प्रश्न- मॉण्टेसरी शिक्षा पद्धति के गुण-दोषों की व्याख्या कीजिए।
  194. प्रश्न- मॉण्टेसरी पद्धति के गुणों की व्याख्या कीजिए।
  195. प्रश्न- मॉण्टेसरी प्रणाली के दोष बताइए।
  196. प्रश्न- डाल्टन पद्धति का मूल्यांकन कीजिए।
  197. प्रश्न- डाल्टन पद्धति के गुणों का वर्णन कीजिए।
  198. प्रश्न- डाल्टन पद्धति की सीमाओं या दोष का वर्णन कीजिए।
  199. प्रश्न- भारत में पूर्व प्राथमिक शिक्षा का विकास बताइए।
  200. प्रश्न- पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के उद्देश्य एवं कार्यक्रमों का उल्लेख कीजिए।
  201. प्रश्न- भारत में पूर्व-प्राथमिक शिक्षा की वर्तमान स्थिति की विवेचना कीजिए।
  202. प्रश्न- भारत में पूर्व प्राथमिक शिक्षा का नियोजन एवं संगठन कैसे किया जाता है?
  203. प्रश्न- माण्टेसरी तथा किण्डरगार्टन पद्धति की तुलना कीजिए।
  204. प्रश्न- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आधारभूत तत्व क्या हैं? विवेचना कीजिए।
  205. प्रश्न- राष्ट्रीय शिक्षा नीति की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  206. प्रश्न- राष्ट्रीय शिक्षा नीति - 2020 के सम्बन्ध में अपने विचार प्रकट कीजिए।
  207. प्रश्न- नई शिक्षा नीति - 2020 में स्कूली शिक्षा से सम्बन्धित बिन्दुओं की विवेचना कीजिए।
  208. प्रश्न- प्राथमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम से आप क्या समझते हैं? इसके गुण व दोषों पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
  209. प्रश्न- भारत में प्राथमिक शिक्षा के विकास को समझाइये।
  210. प्रश्न- प्राचीन एवं मुस्लिम काल में प्राथमिक शिक्षा के विकास पर टिप्पणी कीजिए।
  211. प्रश्न- ब्रिटिश काल में प्राथमिक शिक्षा की समस्या बताइए।
  212. प्रश्न- प्राथमिक शिक्षा की प्रमुख समस्यायें क्या हैं? उन्हें हल करने के सुझाव दीजिए।
  213. प्रश्न- प्राथमिक शिक्षा की प्रमुख समस्याओं का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  214. प्रश्न- विद्यालय व्यवस्था तथा वित्त व्यवस्था से सम्बन्धित प्राथमिक शिक्षा की समस्याएँ लिखिए।
  215. प्रश्न- प्राथमिक शिक्षकों की प्रमुख समस्याओं का वर्णन कीजिए।
  216. प्रश्न- प्राथमिक शिक्षा के समेकित अभिगमन से क्या तात्पर्य है? विस्तारपूर्वक समझाइये।
  217. प्रश्न- प्राथमिक शिक्षा के समेकित अभिगमन से क्या तात्पर्य है?
  218. प्रश्न- प्राथमिक शिक्षा के समेकित दृष्टिकोण के आधारों को स्पष्ट कीजिए।
  219. प्रश्न- समेकित अभिगमन की रूपरेखा का वर्णन कीजिए।
  220. प्रश्न- माध्यमिक शिक्षा की समस्याओं का उल्लेख कीजिए।
  221. प्रश्न- माध्यमिक शिक्षा की प्रमुख समस्याएँ बताइए।
  222. प्रश्न- माध्यमिक शिक्षा के संगठन एवं स्वरूप की समस्या का वर्णन कीजिए।
  223. प्रश्न- माध्यमिक शिक्षा के लक्ष्य निर्धारण की समस्या का वर्णन कीजिए।
  224. प्रश्न- प्राथमिक शिक्षा की अनिवार्यता के प्रयासों पर टिप्पणी कीजिये।
  225. प्रश्न- प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर मूल्यांकन से आप क्या समझते हैं?
  226. प्रश्न- अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा के लिए संवैधानिक व्यवस्था क्या है?
  227. प्रश्न- माध्यमिक शिक्षा के विकास के लिए शिक्षा आयोग (1965-66) ने किन सुझावों को अपनाने पर बल दिया?
  228. प्रश्न- अध्यापक-निर्देशिकाओं तथा शिक्षण सामग्री के महत्त्व से आप क्या समझते हैं? इस सम्बन्ध में कोठारी आयोग के सुझाव बताइये।
  229. प्रश्न- विश्वविद्यालयी सम्प्रभुता से क्या तात्पर्य है? विश्वविद्यालयी सम्प्रभुता की क्या समस्यायें हैं?
  230. प्रश्न- विश्वविद्यालयी सम्प्रभुता से आप क्या समझते हैं?
  231. प्रश्न- विश्वविद्यालयी सम्प्रभुता पर राधा कृष्णन के विचार लिखिए।
  232. प्रश्न- उच्च शिक्षा के मार्ग में कौन-कौन सी समस्याएँ आती हैं? इनके कार्यों का भी उल्लेख कीजिए।
  233. प्रश्न- उच्च शिक्षा के मार्ग में आने वाली प्रमुख समस्याओं का वर्णन कीजिए।
  234. प्रश्न- उच्च शिक्षा के मार्ग में वित्तीय समस्या का वर्णन कीजिए।
  235. प्रश्न- उच्च शिक्षा में उद्देश्यहीनता तथा दोषपूर्ण पाठ्यक्रम पर विचार व्यक्त कीजिए।
  236. प्रश्न- उच्च शिक्षा की प्रमुख समस्याओं के समाधान हेतु उपाय बताइए।
  237. प्रश्न- विश्वविद्यालय के कार्यों के बारे में बताइए।
  238. प्रश्न- उच्च शिक्षा का प्रसार सीमित साधनों से अधिक हो रहा है। विवेचना कीजिए।
  239. प्रश्न- उच्च शिक्षा में बेरोजगारी प्रमुख समस्या है। टिप्पणी कीजिए।
  240. प्रश्न- उच्च शिक्षा के उद्देश्य भारत के सन्दर्भ में क्या होने चाहिए? वर्णन कीजिए।
  241. प्रश्न- भारत में कितने प्रकार के विश्वविद्यालय हैं?
  242. प्रश्न- भारत में विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रकारों का उल्लेख कीजिए।
  243. प्रश्न- केन्द्र शासित विश्वविद्यालय क्या हैं? उनके नाम लिखिए।
  244. प्रश्न- 'खुला विश्वविद्यालय' क्या है ?
  245. प्रश्न- राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के उद्देश्य लिखिए।
  246. प्रश्न- केन्द्रीय व राज्यीय विश्वविद्यालयों को उनके संगठन के अनुसार कितने वर्गों में विभाजित किया गया है?
  247. प्रश्न- मानव विकास संसाधन मंत्रालय का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  248. प्रश्न- यूनेस्को को संक्षेप में समझाइए।
  249. प्रश्न- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के संगठन का विस्तार से उल्लेख कीजिए।
  250. प्रश्न- राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के पाठ्यक्रम प्रारूप की व्यावहारिक उपादेयता का विस्तार से चर्चा कीजिए।
  251. प्रश्न- अध्यापक शिक्षा की गुणवत्ता के सुधार हेतु राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के कार्यों का विवेचन कीजिए।
  252. प्रश्न- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद के संगठन का वर्णन करते हुए उसके कार्यों का उल्लेख कीजिए।
  253. प्रश्न- N.C.E.R.T से आप क्या समझते हैं? इसके महत्व व कार्यों की समीक्षा कीजिए।
  254. प्रश्न- राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  255. प्रश्न- राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान पर टिपणी लिखिये।
  256. प्रश्न- AICTE की क्या भूमिका है?
  257. प्रश्न- IQAC की क्या भूमिका है?
  258. प्रश्न- एन. आई. ओ. एस. क्या है?
  259. प्रश्न- राज्य शैक्षिक अनुसन्धान तथा प्रशिक्षण परिषद के उद्देश्यों एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।
  260. प्रश्न- जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  261. प्रश्न- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संगठन तथा कार्यों को बताते हुए इसके महत्व का वर्णन कीजिए।
  262. प्रश्न- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संगठन का वर्णन कीजिए।
  263. प्रश्न- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के कार्यों का वर्णन कीजिए।
  264. प्रश्न- उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के महत्व पर प्रकाश डालिए।
  265. प्रश्न- "विश्वविद्यालय स्वायत्त संस्थायें हैं।' इस कथन पर टिप्पणी कीजिए।
  266. प्रश्न- डिग्री कॉलेजों के विकास में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
  267. प्रश्न- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के गठन का क्या उद्देश्य था?
  268. प्रश्न- शिक्षा बोर्ड के बारे में विस्तृत विवेचना कीजिए।
  269. प्रश्न- क्या आई.बी. बोर्ड आई.सी.एस.ई. से बेहतर हैं?
  270. प्रश्न- केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड तथा उसके कार्यों का वर्णन कीजिए।
  271. प्रश्न- राज्य शिक्षा बोर्ड पर संक्षिप्त विवरण दीजिए।
  272. प्रश्न- राज्य शिक्षा बोर्ड के कार्य बताइए।
  273. प्रश्न- सी. बी. एस. ई. बोर्ड की ग्रेडिंग प्रणाली के विषय पर टिप्पणी दीजिए।

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